सात चक्र – ग्रह – बीज मंत्र – फ्रीक्वेंसी चार्ट

सात चक्र – ग्रह – बीज मंत्र – फ्रीक्वेंसी चार्ट

सात चक्र – ग्रह – बीज मंत्र – फ्रीक्वेंसी चार्ट

चक्रस्थानग्रहबीज मंत्र  प्रमुख तत्व   प्रचलित हीलिंग फ्रीक्वेंसी
मूलाधार (Muladhara)रीढ़ का आधार 
 शनिलंपृथ्वी396 Hz
स्वाधिष्ठान (Swadhisthana)नाभि के नीचेचन्द्रवंजल417 Hz
मणिपुर (Manipura)नाभिसूर्यरंअग्नि528 Hz
अनाहत (Anahata)हृदयशुक्रयंवायु639 Hz
विशुद्धि (Vishuddha)कण्ठबुधहंआकाश741 Hz
आज्ञा (Ajna)भ्रूमध्यबृहस्पतिॐ / क्षंमन852 Hz
सहस्रार (Sahasrara)सिर का शीर्षकेतु (मोक्ष) (कुछ परम्पराओं में राहु-केतु से परे)मौन / ॐशुद्ध चेतना963 Hz

ग्रह और चक्र का प्रभाव

ग्रहसंबंधित चक्रजीवन में प्रभाव
शनिमूलाधारस्थिरता, सुरक्षा, धैर्य, हड्डियाँ
चन्द्रस्वाधिष्ठानभावनाएँ, रचनात्मकता, प्रजनन शक्ति
सूर्यमणिपुरआत्मविश्वास, पाचन, इच्छाशक्ति
शुक्रअनाहतप्रेम, करुणा, संबंध, सौन्दर्य
बुधविशुद्धिवाणी, संचार, अभिव्यक्ति
बृहस्पतिआज्ञाज्ञान, अंतर्ज्ञान, विवेक
केतुसहस्रारध्यान, मोक्ष, आध्यात्मिक जागरण

फ्रीक्वेंसी का उद्देश्य

Frequencyमुख्य प्रभाव
396 Hzभय, असुरक्षा और नकारात्मकता से मुक्ति
417 Hzपरिवर्तन स्वीकार करना, भावनात्मक शुद्धि
528 Hzऊर्जा, उपचार, आंतरिक परिवर्तन
639 Hzप्रेम, संबंधों में सामंजस्य
741 Hzशरीर एवं मन की शुद्धि, स्पष्ट अभिव्यक्ति
852 Hzतीसरी आँख का जागरण, अंतर्ज्ञान
963 Hzसहस्रार सक्रियता, दिव्य चेतना से जुड़ाव

प्राण योग साधना में इनका उपयोग

दिनचक्रग्रहफ्रीक्वेंसी
सोमवारस्वाधिष्ठानचन्द्र417 Hz
मंगलवारमणिपुरसूर्य ऊर्जा (अग्नि साधना) 528 Hz
बुधवारविशुद्धिबुध741 Hz
गुरुवारआज्ञाबृहस्पति852 Hz
शुक्रवारअनाहतशुक्र639 Hz
शनिवारमूलाधारशनि396 Hz
प्रतिदिन ध्यानसहस्रारकेतु / परम चेतना963 Hz
 साप्ताहिक प्राण योग साधना में उपयोग

आपका कार्यक्रम एक विषय आधारित साप्ताहिक अभ्यास बन सकता है। इसमें प्रत्येक दिन एक गुण को ध्यान और व्यवहार दोनों में विकसित करने का अवसर मिलता है।

दिन–ग्रह सम्बन्ध में एक आवश्यक स्पष्टता है: पारम्परिक वार सम्बन्ध में मंगलवार मंगल का और रविवार सूर्य का दिन है। इसलिए मंगलवार को मणिपुर–सूर्य साधना रखना आपकी चुनी हुई अग्नि साधना की व्यवस्था है। रविवार को सूर्य–मणिपुर ध्यान का विकल्प जोड़ने से यह अन्तर स्पष्ट रहेगा।

दिनध्यान का विषयमंत्रवैकल्पिक ध्वनिदैनिक व्यवहार में अभ्यास
सोमवारस्वाधिष्ठान—भावनात्मक सहजतावं417 Hzअपनी भावना पहचानें और शान्त ढंग से व्यक्त करें
मंगलवारमणिपुर—संकल्प और कर्मरं528 Hzएक आवश्यक काम पूरा करें
बुधवारविशुद्धि—सजग संवादहं741 Hzध्यान से सुनें और स्पष्ट बोलें
गुरुवारआज्ञा—विवेक और अध्ययनॐ852 Hzअध्ययन तथा निर्णय पर आत्मचिन्तन करें
शुक्रवारअनाहत—करुणा और सम्बन्धयं639 Hzकिसी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें
शनिवारमूलाधार—अनुशासन और स्थिरतालं396 Hzदिनचर्या व्यवस्थित करें
रविवारमणिपुर—सूर्य का प्रतीकात्मक ध्यान रं528 Hzआने वाले सप्ताह का संकल्प तय करें
प्रतिदिन, इच्छानुसार सहस्रार—मौनमौन / ॐ  963 Hzकुछ समय शान्त बैठें

एक सरल 10–15 मिनट का अभ्यास

  1. तैयारी—2 मिनट: आरामदायक आसन में बैठें। शरीर सहज और रीढ़ बिना तनाव के सीधी रखें।
  2. श्वास का निरीक्षण—2 मिनट: सामान्य श्वास को अनुभव करें; उसे रोकें या जोर से न चलाएँ।
  3. चक्र पर ध्यान—3 मिनट: चुने हुए स्थान का हल्का बोध रखें। कोई रंग या दृश्य न दिखे तो भी अभ्यास चल सकता है।
  4. मंत्र जप—2–3 मिनट: बीज मंत्र का कोमल उच्चारण या मानसिक जप करें।
  5. मौन—2–3 मिनट: ध्वनि के बाद शान्त बैठें। चाहें तो धीमी आवाज में सम्बन्धित ध्यान संगीत रखें।
  6. व्यवहार का संकल्प—1 मिनट: आज के गुण को जीवन में लागू करने का एक छोटा कदम चुनें।
                                                                                                                                                                                                                       =======================                                                                                                                                                                                            

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