प्राण योग के चमत्कारी प्रभाव
प्राण योग: शरीर, मन और आत्मा का मिलन
प्राण योग एक प्राचीन अभ्यास है, जो शरीर, मन और आत्मा में एकत्व की अनुभूति उत्पन्न करने में सहायता करता है। यह हमारे जीवन में संतुलन लाता है।
उचित वातावरण और सही मार्गदर्शन में किया गया पारंपरिक योगाभ्यास मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित करता है तथा उपचार की ओर ले जाता है। योगाभ्यास के माध्यम से सभी स्तर शुद्ध और संतुलित होते हैं। इसलिए योग स्वभाव से ही उपचारात्मक है।
लोग प्राण योग का अभ्यास क्यों करना चाहते हैं?
स्वास्थ्य से संबंधित योग के प्राचीन सिद्धांतों तथा मन, शरीर और उनके पारस्परिक संबंधों के बारे में किए गए अवलोकनों को आधुनिक चिकित्सा स्वीकार कर रही है। शुद्धि क्रियाओं, सूक्ष्म यौगिक व्यायामों, योगासनों, बंधों, मुद्राओं, हस्त मुद्राओं, प्राणायाम और ध्यान जैसी यौगिक विधियों के स्वास्थ्य लाभों पर व्यापक शोध किया जा रहा है।
योगाभ्यास से होने वाले शारीरिक, चयापचय संबंधी और तंत्रिका-अंतःस्रावी परिवर्तनों का आधुनिक चिकित्सा वैज्ञानिकों ने गहन अध्ययन किया है तथा अनेक मामलों में निश्चित निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य और स्वस्थ रहने की अनुभूति में हुए अधिकांश सुधारों को चिकित्सकों ने स्थापित और पुष्ट किया है।
प्राण योग की भूमिका
प्राण योग इस दृष्टि को और व्यापक बनाता है। यह केवल शरीर या मन तक सीमित न रहकर व्यक्ति के ऊर्जा-स्तर पर कार्य करता है। इसकी भूमिका को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- पाँच तत्वों का संतुलन: प्राण योग व्यक्ति के भीतर के पाँचों तत्वों को संतुलित करता है।
- सात चक्रों का संतुलन: यह सातों चक्रों को संतुलित करने में सहायक है।
- आभामंडल की शुद्धि: यह आभामंडल को शुद्ध करता है।
- 99 साधनाएँ, 99 ध्यान विधियाँ और 99 प्राण योग क्रियाएँ: प्राण योग इनका समूह है।
- स्वर विज्ञान: स्वर विज्ञान के माध्यम से रोगों का निदान किया जाता है।
- हस्त मुद्रा विज्ञान: हस्त मुद्रा विज्ञान के माध्यम से बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
- पाँच प्राण का संतुलन: पाँच प्राणों के संतुलन द्वारा व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य में प्रगति होती है।
इन सबके माध्यम से प्राण योग किसी भी व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक समस्याओं के निदान तथा आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
प्राण योग के शारीरिक स्वास्थ्य लाभ
प्राण योग से बढ़ने या बेहतर होने वाले पक्ष
- रोग प्रतिरोधक क्षमता
- नवजीवन और पुनर्यौवन
- शारीरिक मुद्रा में सुधार
- सहनशक्ति
- ऊर्जा का स्तर
- मांसपेशियों की शक्ति
- हृदय एवं रक्तसंचार तंत्र की कार्यक्षमता
- मांसपेशियों और अस्थि तंत्र का लचीलापन
- त्वचा की गैल्वैनिक प्रतिक्रिया
- स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की स्थिरता
- ईईजी में अल्फा तरंगें
- श्वसन की कार्यक्षमता
- श्वास रोकने की अवधि
- पकड़ने की शक्ति
- स्थिरता
- उत्सर्जन की कार्यक्षमता
- प्रतिक्रिया का समय
- संवेदी और कर्मेंद्रियों का समन्वय
- नींद
- शक्ति और दमखम
प्राण योग से कम होने वाले पक्ष
- घबराहट के दौरे
- चक्कर आना
- श्वसन की दर
- नाड़ी की गति
- रक्तचाप
- ईएमजी गतिविधि
- सिरदर्द
- पेट दर्द
प्राण योग से सामान्य होने वाले पक्ष
- त्रिदोष
- जठरांत्र संबंधी कार्यप्रणाली
- अंतःस्रावी ग्रंथियों की कार्यप्रणाली
- स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली
- शरीर का वजन
- रक्तचाप
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प्राण योग के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य लाभ
प्राण योग से बढ़ने या बेहतर होने वाले पक्ष
- शरीर और उसकी गति के प्रति जागरूकता
- सकारात्मक दृष्टिकोण
- मनोदशा और व्यक्तिगत सुख-स्वास्थ्य की अनुभूति
- स्वयं को स्वीकार करने की क्षमता
- सामाजिक समायोजन और सामाजिक कौशल
- एकाग्रता
- स्मरणशक्ति
- स्वयं के प्रति ध्यान
- सीखने की दक्षता
- अपनी पूर्ण क्षमता को साकार करना
- गहराई और दूरी का बोध
- मन और शरीर के बीच तंत्रिका संबंध
- संतुलन
- स्थिरता
- इच्छाशक्ति
प्राण योग से कम होने वाले पक्ष
- तनाव
- हताशा
- चिंता
- अवसाद
- शत्रुता
- ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार
- हिस्टीरिया
- अनिद्रा
- थकान
- मासिक धर्म से पहले होने वाला तनाव
- परीक्षा की घबराहट
- मानसिक श्रम से उत्पन्न थकावट
- याद रख पाने में कठिनाई
- बार-बार होने वाली गलतियाँ
- क्रोध
प्राण योग से सामान्य होने वाले पक्ष
- त्रिगुण
- भावनाएँ
- हार्मोन संतुलन
प्राण योग के जैव-रासायनिक स्वास्थ्य लाभ
योग से बढ़ने वाले पक्ष
- एचडीएल कोलेस्ट्रॉल
- कोलिनेस्टरेज़
- एटीपी
- हीमोग्लोबिन
- लिम्फोसाइट की संख्या
- थायरॉक्सिन
- विटामिन सी
- कुल सीरम प्रोटीन
प्राण योग से कम होने वाले पक्ष
- एलडीएल कोलेस्ट्रॉल
- मानव वृद्धि हार्मोन (एचजीएच)
- वीएलडीएल कोलेस्ट्रॉल
- मेलाटोनिन
- ग्लूकोज़
- सोडियम
- कुल कोलेस्ट्रॉल
- ट्राइग्लिसराइड्स
- कैटेकोलामीन
- श्वेत रक्त कोशिकाओं की कुल संख्या
प्राण योग से सामान्य होने वाले पक्ष
- चयापचय
- विटामिन
- प्रोटीन
- खनिज
प्राण योगिक व्यायाम और गैर-योगिक व्यायाम के स्वास्थ्य लाभों की तुलना
| योगिक व्यायाम | गैर-योगिक व्यायाम |
|---|---|
| शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास | केवल शारीरिक विकास |
| मेरुदण्ड में लचीलापन | मेरुदण्ड में कठोरता |
| रोगों का उपचार | रोगों में वृद्धि |
| मांसपेशियों में शिथिलता | मांसपेशियों में बढ़ा हुआ तनाव |
| धीमी और स्थिर गतिविधियाँ | तेज़ और बलपूर्वक गतिविधियाँ |
| चोट लगने का कम जोखिम | चोट लगने का अधिक जोखिम |
| परानुकंपी तंत्र की प्रधानता | अनुकंपी तंत्र की प्रधानता |
| मस्तिष्क के उपप्रांतस्थ क्षेत्रों की प्रधानता | मुख्यतः मस्तिष्क के प्रांतस्थ क्षेत्रों की प्रधानता |
| कैलोरी की कम खपत | कैलोरी की अधिक खपत |
| अधिकतम विश्राम के साथ न्यूनतम प्रयास | कम विश्राम के साथ अधिकतम प्रयास |
| श्वास प्राकृतिक और समन्वित होती है | श्वास बलपूर्वक और असमन्वित होती है |
| पूर्णतः प्रक्रिया पर केंद्रित | पूर्णतः लक्ष्य पर केंद्रित |
| जागरूकता भीतर की ओर होती है | जागरूकता बाहर की ओर होती है |
| विषाक्त पदार्थ कम होते हैं | विषाक्त पदार्थ बढ़ते हैं |
| आयु और लिंग का कोई प्रतिबंध नहीं | प्रतिबंध होते हैं |
| सकारात्मक दृष्टिकोण | मिश्रित दृष्टिकोण |
योग का दर्शन और परम उद्देश्य
आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान से प्राप्त प्रमाणों के अतिरिक्त, योग दार्शनिक साहित्य और सिद्धांतों से भी समृद्ध है। योगाभ्यास की अवधारणा और उसका दर्शन सुदूर अतीत से उत्पन्न हुए हैं तथा व्यवस्थित और समग्र दृष्टिकोण के साथ पचास शताब्दियों से अपनाए जाते रहे हैं।
योग का परम उद्देश्य मन को स्थिर करना और विचारों को इस सार्वभौमिक सत्य पर केंद्रित करना है कि मनुष्य दिव्यता का विस्तार हैं। परम सत्ता में एकत्व के लिए धर्म या मनुष्य द्वारा बनाई गई किसी अन्य सीमा का कोई अवरोध नहीं है। आत्मा सार्वभौमिक, अमर, प्रकाशमय, अनंत और दिव्य है तथा सभी मनुष्यों में एक ही है।
योग का यही अंतिम संदेश है। यदि इसका प्रसार किया जाए, तो यह पूरे विश्व को ऐसे जीवन-पथ पर ले जा सकता है, जो शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और संघर्षों से मुक्त हो। अधिकांश लोगों के लिए योग के इस परम लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन हो सकता है, लेकिन इस मार्ग पर थोड़ी-सी प्रगति भी व्यक्ति को अत्यंत स्वस्थ, संतुष्ट और आनंदित बना देती है।
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