हिस्टीरिया, हिस्टीरिया के लक्षण, हिस्टीरिया का योग उपचार

हिस्टीरिया, हिस्टीरिया के लक्षण, हिस्टीरिया का योग उपचार

हिस्टीरिया

परिभाषा

यौगिक परंपरा के अनुसार हिस्टीरिया तीव्र चिंता से उत्पन्न मानसिक विकार है। इसमें व्यक्ति अपने व्यवहार और भावनाओं पर नियंत्रण खो सकता है। भावनात्मक उभार के साथ अचानक बेहोशी जैसे दौरे भी हो सकते हैं।

इसे व्यक्ति के भीतर दबे हुए मानसिक संघर्षों का परिणाम बताया गया है। यह पुरुषों और महिलाओं, दोनों में हो सकता है, लेकिन इस मान्यता के अनुसार 14 से 25 वर्ष की युवतियों में अधिक पाया जाता है।

कारण

पारंपरिक मान्यता के अनुसार निम्न कारण बताए गए हैं:

  • तनाव
  • यौन भावनाओं का दमन
  • विचारों की विकृत आदतें
  • निष्क्रियता
  • आनुवंशिक प्रभाव
  • परिवार में घबराहट या अस्थिरता का वातावरण
  • बचपन में भावनात्मक विकास और प्रशिक्षण की कमियाँ
  • मानसिक दबाव
  • भय और चिंता
  • अवसाद
  • आघात
  • हस्तमैथुन
  • लंबे समय तक बीमारी

लक्षण

हाथ-पैरों में भारीपन और ऐंठन

  • हाथ-पैरों में भारीपन
  • तेज़ ऐंठन
  • पेट में कसाव का अनुभव, जो ऊपर की ओर बढ़ता महसूस हो
  • बार-बार लंबी साँस या आह भरना
  • साँस लेने में कठिनाई
  • छाती में कसाव
  • धड़कन तेज़ होना
  • गले में कोई चीज़ अटकी होने का अनुभव
  • गर्दन और उसकी नसों में सूजन
  • दम घुटना
  • सिर दर्द
  • दाँत भींचना
  • शरीर की मांसपेशियों में तनाव

गंभीर अवस्था में

  • तेज़ और दर्दभरी चीखें
  • चेतना का आंशिक रूप से खो जाना
  • गर्दन में अधिक सूजन
  • बहुत तेज़ और अनियमित धड़कन
  • मांसपेशियों का अनैच्छिक संकुचन
  • पूरे शरीर में तेज़ ऐंठन
  • शरीर की तीव्र और अनियंत्रित गतिविधियाँ

कमज़ोरी और भावनात्मक अस्थिरता

यौगिक परंपरा में इच्छाशक्ति की कमज़ोरी, प्रेम और सहानुभूति पाने की तीव्र इच्छा तथा भावनात्मक अस्थिरता का भी उल्लेख है।

हिस्टीरिया की अचेतन या तंद्रा जैसी अवस्था कई दिनों या सप्ताहों तक रह सकती है। व्यक्ति गहरी नींद में दिखाई दे सकता है, लेकिन उसकी मांसपेशियाँ सामान्यतः ढीली नहीं होतीं।


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यौगिक उपचार

षट्कर्म

  • जलनेति

योगासन

भुजंगासन, मत्स्यासन, धनुरासन, विपरीतकरणी, गोमुखासन, अर्धमत्स्येंद्रासन, हलासन, पश्चिमोत्तानासन, पवनमुक्तासन, शलभासन, शवासन, सर्वांगासन, योगमुद्रा, पद्मासन, वज्रासन और मंडूकासन।

प्राणायाम

कपालभाति, भ्रामरी और अनुलोम-विलोम।

बंध

उड्डीयान बंध।

मुद्राएँ

ज्ञान मुद्रा और अश्विनी मुद्रा।

ध्यान

ॐ का उच्चारण।

योग-संगीत

असावेरी, वृंदावनी और बिलहरी राग।

उपवास

यौगिक उपचार में उपवास का भी उल्लेख है।

यौगिक आहार

केवल फलों का आहार

यौगिक परंपरा के अनुसार उपचार की शुरुआत कुछ दिनों तक केवल फल खाने से की जाती है। दिन में तीन बार संतरा, सेब, अंगूर, चकोतरा, पपीता और अनानास जैसे रसदार फल बताए गए हैं।

केवल दूध का आहार

इसके बाद लगभग एक महीने तक केवल दूध लेने का उल्लेख है। इस मान्यता के अनुसार दूध रक्त निर्माण और नसों के पोषण में सहायक होता है।

यदि केवल दूध का आहार संभव न हो, तो दूध और फल लिए जा सकते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे बीज, मेवे, अनाज, सब्ज़ियाँ और फल मिलाकर संतुलित आहार अपनाने की बात कही गई है।

जिनसे बचने का उल्लेख है

शराब, चाय, कॉफ़ी, तंबाकू, सफ़ेद चीनी, मैदा और उनसे बने पदार्थ।

घरेलू उपाय

जामुन

पारंपरिक मान्यता में जामुन को हिस्टीरिया के लिए प्रभावी घरेलू उपाय बताया गया है। तीन किलो जामुन और एक मुट्ठी नमक पानी से भरे बर्तन में डालकर एक सप्ताह धूप में रखने का उल्लेख है।

इसके बाद खाली पेट 300 ग्राम जामुन खाने और उसी बर्तन का एक कप पानी पीने की बात कही गई है।

जिस दिन यह प्रक्रिया शुरू की जाए, उसी दिन दूसरे बर्तन में तीन किलो जामुन, एक मुट्ठी नमक और पानी डालकर रखने का उल्लेख है, ताकि पहले बर्तन की सामग्री समाप्त होने पर दूसरा तैयार हो। यह प्रक्रिया दो सप्ताह जारी रखने की बात कही गई है।

शहद

प्रतिदिन एक बड़ा चम्मच शहद लेने का उल्लेख है।

लौकी

ताज़ी लौकी का कुचला हुआ गूदा सिर पर लगाने की बात कही गई है।

सलाद पत्ता

एक कप ताज़े सलाद पत्ते के रस में एक छोटा चम्मच आँवले का रस मिलाकर प्रतिदिन सुबह एक महीने तक लेने का उल्लेख है।

सर्पगंधा

सुबह और शाम एक-एक ग्राम सर्पगंधा की जड़ का चूर्ण एक कप दूध के साथ लेने तथा पूरी तरह ठीक होने तक जारी रखने की बात कही गई है।

हींग

पारंपरिक मान्यता में हींग सूँघने को दौरे रोकने में लाभकारी बताया गया है। खाने के लिए प्रतिदिन आधा से एक ग्राम मात्रा का उल्लेख है।

मुँह से हींग लेने से इनकार करने की स्थिति में दो ग्राम हींग और 120 मिलीलीटर पानी से बने मिश्रण का एनीमा देने का भी उल्लेख है।

अन्य सुझाव

आत्मनियंत्रण और मन को व्यस्त रखना

व्यक्ति को आत्मनियंत्रण और सही ढंग से सोचने की आदत सिखाने की बात कही गई है। उसका ध्यान लगातार स्वयं पर केंद्रित रहने से हटाने, उचित यौन शिक्षा देने और विवाहित महिला को सामान्य दांपत्य संबंध समझाने का उल्लेख है।

व्यायाम और बाहर खेले जाने वाले खेल

व्यायाम और खुले में खेलना मन को व्यस्त रखने तथा प्रसन्नता बढ़ाने में सहायक बताया गया है।

हिस्टीरिया में योग और प्राण योग कैसे उपयोगी हो सकते हैं

हिस्टीरिया को चिंता, दबे हुए मानसिक संघर्षों और भावनात्मक अस्थिरता से जुड़ा बताया गया है। योग शरीर, श्वास और मन को एक साथ साधता है, इसलिए आसन, प्राणायाम, ध्यान और योग-संगीत जैसे अभ्यास मन को शांत करने और शिथिलता लाने की दिशा में उपयोगी हो सकते हैं।

प्राण योग इस दृष्टि को और व्यापक बनाता है। यह केवल शरीर या मन तक सीमित न रहकर व्यक्ति के ऊर्जा-स्तर पर कार्य करता है:

  • पाँच तत्वों का संतुलन: प्राण योग व्यक्ति के भीतर के पाँचों तत्वों को संतुलित करता है।
  • सात चक्रों का संतुलन: यह सातों चक्रों को संतुलित करने में सहायक है।
  • आभामंडल की शुद्धि: यह आभामंडल को शुद्ध करता है।
  • 99 साधनाएँ, 99 ध्यान विधियाँ और 99 प्राण योग क्रियाएँ: इनके माध्यम से प्राण योग शारीरिक और मानसिक समस्याओं के समाधान तथा आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।

इस प्रकार प्राण योग का दृष्टिकोण व्यक्ति को शरीर, मन और ऊर्जा, तीनों स्तरों पर संतुलन की ओर ले जाने वाला माना जाता है।


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